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Showing posts from September, 2020

सतयुग मे हु़ई हनुमान जी से एक यह एक गलती, जिसकी सजा आज भी सहती है यहा की महिलाएं !!!

सतयुग मे हु़ई हनुमान जी से एक यह एक गलती, जिसकी सजा आज भी सहती है यहा की महिलाएं !!! पवन पुत्र हनुमान जी की शक्ति एवं महिमा अपरम्पार है हर जगह हनुमान जी के भक्त उनकी भक्ति में रंगा रहते है. परन्तु क्या आप जानते है की एक ऐसा भी गाव है जहां हनुमान जी के द्वारा की गई एक गलती के कारण वहां के लोग विशेषकर महिलाएं हनुमान जी से नाराज है।रामायण काल में घटित इस घटना ने इस गाव में एक अजीब सी प्रथा को जन्म दे दिया है जिस कारण यहाँ की महिला अत्यधिक परेशान रहती है और इस परेशानी का दोष वे हनुमान जी को देती है। आइये आज हम आपको गाँव की उस अजीब सी प्रथा एवं हनुमान जी द्वारा की गई उस एक गलती के संबंध में बतलाते है। उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में एक द्रोणागिरि नामक गाव 14000 फुट की उच्चाई पर स्थित है। इस दुर्गम गाव में सभी भगवान देवी-देवताओ की पूजा की जाती सिर्फ एक भगवान को छोड़कर और वे है संकटमोचन पवन पुत्र हनुमान जी।लक्ष्मण जी के उपचार के लिए संजीवनी बूटी लाकर हनुमान जी भगवान श्री राम एवं वानर सेना के लिए तो हीरो बन गए परन्तु इस गाव के सभी लोग हनुमान जी से नाराज है। द्रोणागिरि के लोग आज तक हनुमान जी क...

हैरानी होगी पढ़ने में; रामायण काल के दौरान किया था विभीषण ने पहला मोबाइल इस्तमाल, थे और भी कई आधुनिक यन्त्र..!!!

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हैरानी होगी पढ़ने में; रामायण काल के दौरान किया था विभीषण ने पहला मोबाइल इस्तमाल, थे और भी कई आधुनिक यन्त्र..!!! deepika gupta  |  September 11, 2017  |  अविश्वसनीय रहस्य |  3 Comments   लंकापति रावण के छोटे भाई विभीषण आपको हैरानी तो होगी यह पढ़ने में लेकिन शोधकर्ताओं का ऐसा कहना है कि सबसे पहले रामायण काल के दौरान लंका में दूरसंचार के यंत्रों का निर्माण हुआ था। उस युग में इन यंत्रों को मधुमक्खी कहा जाता था। इस यंत्र को दुनिया का पहला मोबाइल भी कहा जा सकता है। कहा जाता है इस यंत्र पर बात करने से पहले एक ख़ास ध्वनि वाली रिंगटोन तक बजती थी। इस ख़ास ध्वनि के कारण ही इस यंत्र को मधुमक्खी कहा जाता था। इस यंत्र के इस्तेमाल की इजाजत केवल राज परिवार के लोगों को थी। इस अनूठे यंत्र के जरिये राज परिवार के लोग कभी भी और कहीं भी बैठे किसी दूसरे व्यक्ति से बात करते थे।शोधकर्ताओं ने पाया कि जब लंकापति रावण ने अपने छोटे भाई विभीषण को देश निकाला दिया था तब वह मधुमक्खी और दर्पण यंत्रों के अलावा अपने 4 मंत्री अनल, पनस, संपाती और प्रभाती को अपने साथ लेकर प्रभु राम की शरण में आए थे...

क्या आपको पता है पांच पांडव गये थे बिना शरीर त्यागे स्वर्ग ??? धरती की इस जगह से ही जाता है स्वर्ग का रास्ता !!!

क्या आपको पता है पांच पांडव गये थे बिना शरीर त्यागे स्वर्ग ??? धरती की इस जगह से ही जाता है स्वर्ग का रास्ता !!! यूं तो कश्मीर को ‘धरती का स्वर्ग’ कहा जाता है। परन्तु क्या आपको पता है कि भारतभूमि पर ही एक ऐसा स्थान है जहां से स्वर्ग की ओर जाया जा सकता है।ऐसी मान्यता है कि मनुष्य मृत्यु के पश्चात स्वर्ग या नर्क जाता है परन्तु इस मार्ग के जरिए मनुष्य बिना शरीर त्यागे स्वर्ग का दर्शन कर सकता है। इस तथ्य की प्रमाणिकता महाभारत काल में मिलता है। यदि प्राकृतिक सुन्दरता के लिए कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है तो उत्तराखंड को कई धार्मिक स्थानों और देवी-देवताओं के वास स्थान के लिए धरती पर स्वर्ग और देव भूमि कहा जाता है, और यह कहना भी उचित है क्योंकि यही वह स्थान है जहां से सीधा स्वर्ग के लिए रास्ता जाता है।उत्तराखंड के गढ़वाल में हिमालय के बंदरपूंछ में स्थित ‘स्वर्गारोहिनी’ चोटी से ही स्वर्ग का रास्ता जाता है। स्वर्गारोहिनी को महाभारत काल से ही स्वर्ग जाने के रास्ते के रूप में मान्यता प्राप्त है। महाभारत काल के ग्रंथों में इस स्थान का बहुत महत्व दिया गया है और इस स्थान के विषय में कहा गया है...

जानें कैसे हुई विष्णु नाम की उत्पत्ति; क्या है विष्णु जी के नाम का अर्थ…!!!

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जानें कैसे हुई विष्णु नाम की उत्पत्ति; क्या है विष्णु जी के नाम का अर्थ…!!! deepika gupta  |  March 30, 2018  |  अविश्वसनीय रहस्य ,  हिंदू देवी देवता  |  4 Comments भारतीय पौराणिक कथा (INDIAN MYTHOLOGICAL STORY) हिन्दू धर्म के आधारभूत ग्रन्थों में बहुमान्य पुराणानुसार विष्णु (Vishnu) परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों में त्रिमूर्ति विष्णु (Vishnu) को जगत का पालनहार कहा गया है। लेकिन क्या आप जानते है त्रिमूर्ती के देवों में से एक विष्णुजी का नाम विष्णु (Vishnu) क्यों पड़ा । भगवान विष्णु उनके इस नाम का अर्थ क्या है। आज हम आपको बताते है इस नाम के पीछे का रहस्य । विष्णु नाम की उत्पत्ति माना जाता है कि विष्णु (Vishnu) शब्द की उत्पत्ति मुख्यतः विष धातु से हुई है। निरुक्त 12.18 में यास्काचार्य ने मुख्य रूप से  विष्  धातु को ही व्याप्ति के अर्थ में लेते हुए उससे विष्णु (Vishnu) शब्द को निष्पन्न बताया है। भगवान विष्णु वैकल्पिक रूप से विष्  धातु  को भी प्रवेश के अर्थ में लिया गया है, ‘क्योंकि वह विभु होने से सर्वत्र प्रवेश...

रामायण के अनुसार,इन 4 स्त्रियों का अपमान करने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रहता..!!आप भी जानें..!!!

रामायण के अनुसार,इन 4 स्त्रियों का अपमान करने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रहता..!!आप भी जानें..!!! हमारे भारत में नारी को लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा के रूप में पूजा जाता है,स्त्री को देवी का स्वरूप माना जाता है। ऐसा कहा जाता है जहाँ स्त्रियों का आदर किया जाता है, वहाँ देवता निवास करते हैं लेकिन जहाँ इनका अनादर होता है, वहाँ सारे काम निष्फल होते हैं। वैसे तो हर नारी सम्मान की पात्र है। मगर तुलसीदास द्वारा रचित राम चरित मानस में चार स्त्रियों के सम्मान की बात को विशेष तौर पर उल्लेखित किया गया है। इसके मुताबिक जो भी व्यक्ति इन चार महिलाओं का अपमान करता है। इनके साथ दुराचार करता है। उसका जीवन हमेशा ही दरिद्रता और आर्थिक तंगी से गुजरता है। आइये जानते है उन ४ स्त्रियों के बारे में: घर की बहु घर की बहु को घर की लक्ष्मी माना जाता है। कहा जाता है कि बहु के प्रवेश के बाद घर में हर काम शुभ होता है। बहु अपना घर छोड़कर पराए घर आती है। ऐसे में उसके साथ आदर का भाव रखा जाना चाहिए। ऐसा पुरुष जो घर की बहु का सम्मान नहीं करता,वो कभी भी कहीं भी खुश नहीं रहता। जीवनभर परेशानियां उसके साथ जुड़ी रहती हैं। बड़े भ...

कौन थी शबरी,क्या था उनका असली नाम..!!जरूर पढ़िए..!!!

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कौन  थी शबरी,क्या था उनका असली नाम..!!जरूर पढ़िए..!!! शबरी तो आप सबको याद ही होंगी चलिए आज जानते है कुछ शबरी के बारे में ।शबरी श्री राम की परम भक्त थी जिन्होंने उन्हें झूठे बैर खिलाये थे, शबरी का असली नाम “श्रमणा” था, वह भील सामुदाय के शबर जाति से सम्बन्ध रखती थीं इसी कारण कालांतर में उनका नाम शबरी पड़ा । उनके पिता भीलों के मुखिया थे, श्रमणा उनका विवाह एक भील कुमार से तय हुआ था, विवाह से पहले कई सौ पशु बलि के लिए लाये गए जिन्हें देख श्रम बड़ी आहत हुई. यह कैसी परंपरा जिसके बेजुबान और निर्दोष जानवरो की हत्या की जाएगी इस कारण शबरी विवाह से 1 दिवस पूर्व भाग गई और दंडकारण्य वन में पहुंच गई। दंडकारण्य में मातंग ऋषि तपस्या किया करते थे, श्रमणा उनकी सेवा तो करना चाहती थी पर वह भील जाति की होने के कारण उसे अवसर ना मिलाने का अंदेशा था। फिर भी शाबर सुबह-सुबह ऋषियों के उठने से पहले उनके आश्रम से नदी तक का रास्ता साफ़ कर देती थीं, कांटे चुनकर रास्ते में साफ बालू बिछा देती थी। यह सब वे ऐसे करती थीं कि किसी को इसका पता नहीं चलता था। 1 दिवस ऋषिश्रेष्ठ को शबरी दिख गई और उनके सेवा से अति प्रसन्न हो गए ...

जानिए क्यों; इतना बड़ा सोने का महल होते हुए भी रावण ने रखा था माता सीता को अशोक वाटिका में..!!!

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जानिए क्यों; इतना बड़ा सोने का महल होते हुए भी रावण ने रखा था माता सीता को अशोक वाटिका में..!!! deepika gupta  |  September 19, 2017  |  अविश्वसनीय रहस्य |  1 Comment आज हम बात कर रहें है की ऐसा क्या हुआ था की रावण का इतना बड़ा सोने का महल होते हुए भी उसने माता सीता को अशोक वाटिका में रखा ,कभी भी माता सीता के समीप आने अथवा उन्हें छूने का भी दुस्साहस नहीं किया ।आप भी सोच रहें होंगे ऐसा क्यों की असुर सम्राट लंकापति रावण यदि चाहता तो वह माता सीता को विवाह के लिए जबरजस्ती विवश कर सकता है अथवा अपनी बात मनवाने के लिए वह माता सीता को कष्ट दे सकता था । लेकिन रावण ने ऐसा कुछ नहीं किया तथा वह माता सीता के स्वीकृति का इन्तजार करता रहा । क्या उसे कोई दर था या वह किसी वचन से बंधा हुआ था । इन सभी सवालों के जवाब हमारे पुराणों में छिपे हुए है जिसके बारे में हम आज आपको यहाँ बताने जा रहे है । लंकापति रावण के स्वर्ण महल का निर्माण कुबेर देव द्वारा किया गया था । सोने का यह महल बहुत ही भव्य एवं विशाल तो था ही इसके साथ ही यह आकर्षक भी था । यदि एक बार कोई इस महल को देख लेता तो इसके आकर्...

पत्नी के खौफ से तो देवता भी नहीं बचे,जाने पुराणों में छिपी इस राज से जुडी रोचक कथा..!!!

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पत्नी के खौफ से तो देवता भी नहीं बचे,जाने पुराणों में छिपी इस राज से जुडी रोचक कथा..!!! पत्नी के खौफ से तो देवता भी नहीं बचे आज हम आपको पौराणिक रोचक कथा के बारे में बताने जा रहे है जिसको पढ़कर आप भी समझ जाएँगे की पत्नी के खौफ से तो देवता भी नहीं बचे तो फिर आम आदमी कैसे बचे, तो आइये पढ़ते है वो कथा । स्त्री शक्ति का अंदाजा भगवान शिव को तब हुआ जब उन्होंने एक बार देवी सती को मायके जाने से मना कर दिया । देवी सती इस बात के लेकर बहुत क्रोधित हुई तथा उन्होंने विकराल रूप धारण कर लिया अंत में भगवान शिव ने इस बात को तय कर लिया की हमेशा पत्नी का वर्चस्व रहेगा । भगवान विष्णु भी पत्नी के प्रभाव से अछूते नहीं है। एक बार दुर्वाशा ऋषि के श्राप के कारण देवी लक्ष्मी वैकुंठ धाम छोड़कर अपने मायके सागर के अंदर चली गयी। इसके बाद पुरे देवलोक के साथ ही वैकुण्ठलोक में भी अन्धेरा छा गया। इसके बाद सागर मंथन द्द्वारा लक्ष्मी पुनः प्रकट हुई तथा भगवान विष्णु ने फिर उन्हें नाराज करने का जोखिम नही लिया। ब्रह्मा जी देवी सरस्वती की सत्ता को स्वीकार करते हैं देवी सरस्वती ने जब ब्रह्मा के साथ गायत्री को देखा तो ब्रह्मा जी क...

बाली ने मरते समय बताई थी ये 3 बाते, जो हर मनुष्य के जीवन में होनी चाहिए…

बाली ने मरते समय बताई थी ये 3 बाते, जो हर मनुष्य के जीवन में होनी चाहिए… रामायण में जब श्री राम ने बाली को बाण  मारा तो उस बाण के प्रहार से बाली घायल होकर जमीन पर गिर गए |इस अवस्था में जब पुत्र अंगद उसके पास आया तब बालि ने उन्हें अपने जीवन को सफल बनाने के लिए ज्ञान की कुछ बाते बताई | ये बाते आज भी आपको जीवन में सफलता प्राप्त करने में उपयोगी होगी और जीवन की सभी परेशानियों को दूर करने में लाभकारी होगी | ये थी वो 3 बाते जो बालि ने अपने अंतिम समय में अंगद को कही थी | बालि ने कहा : – देशकालौ भजस्वाद्य क्षममाण: प्रियाप्रिये। सुखदु:खसह: काले सुग्रीववशगो भव।।  उपरोक्त पंक्ति का अर्थ हा कि… 1.  देश काल और परिस्थितियों को समझो। 2.  किसि भी व्यक्ति के साथ कब, कहा और कैसा व्यव्हार करना चाहिए इस बात का सही निर्णय करना अति आवश्यक है| 3.  पसंद-नापसंद, सुख-दु:ख को सहन करना चाहिए और क्षमाभाव के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए।

पिता से क्यों मिला नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप, किस श्राप की वजह से इधर-उधर भटकते रहते है देवऋषि नारद..!!!

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पिता से क्यों मिला नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप, किस श्राप की वजह से इधर-उधर भटकते रहते है देवऋषि नारद..!!! deepika gupta  |  July 13, 2018  |  अविश्वसनीय रहस्य ,  हिंदू देवी देवता  |  4 Comments भारतीय पौराणिक कथा (INDIAN MYTHOLOGICAL STORY) नारायण -नारायण (Narayan) करने वाले नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप मिला था । पुराणों और शास्त्रों के अनुसार देव लोक का दूत कहे जाने वाले देवऋषि नारद,  ब्रह्मा  (Brahma) के सात मानस पुत्रों में से एक हैं। भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों में से एक नारद जी (Narad Ji) एक लोक से दूसरे लोक की परिक्रमा करते हुए सूचनाओं को प्रेषित करते थे। नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप आज हम आपको बता रहें है वैसे तो  नारद मुनि  को कई बार प्रेम हुआ पर फिर भी किसी से भी नहीं हुई उनकी शादी, इसका कारण था उनके पिता द्वारा अविवाहित होने का श्राप मिलना। आइये जानते है ऐसा क्या हुआ की ब्रह्मा (Brahma) जी ने दिया नारद जी (Narad Ji) को अविवाहित रहने का श्राप: नारद जी को अविवाहित रहने का श्राप ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्मखण्...

सूर्य देव सात ही घोड़ों की सवारी क्यों करते है…????

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सूर्य देव सात ही घोड़ों की सवारी क्यों करते है…???? सूर्य देव अपने सात घोड़ो के साथ संसार को रोशनी देने वाले सूर्य देव के रथ पर सात घोड़े दिखाई देते है सूर्य देव के बारे में कई कथाये प्रसिद्ध है।उन में से एक है सूर्य देव के सात घोड़ो के बारे में,आइये आज हम जानते है सूर्य देव के रथ में सात ही घोड़े क्यों है। यह सात घोड़े एक रोशनी को दर्शाते हैं। एक ऐसी रोशनी जो स्वयं सूर्य देवता यानी कि सूरज से ही उत्पन्न होती है। यह तो सभी जानते हैं कि सूर्य के प्रकाश में सात विभिन्न रंग की रोशनी पाई जाती है जो इंद्रधनुष का निर्माण करती है। यह रोशनी एक धुर से निकलकर फैलती हुई पूरे आकाश में सात रंगों का भव्य इंद्रधनुष बनाती है। सूर्य भगवान के सात घोड़ों को इंद्रधनुष के सात रंगों से जोड़ा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि हम इन घोड़ों को ध्यान से देखें तो प्रत्येक घोड़े का रंग भिन्न है तथा वह एक-दूसरे से ज़रा भी मेल नहीं खाते है । एक और कारण है जो यह बताता है कि सूर्य भगवान के रथ को चलाने वाले सात घोड़े स्वयं सूरज की रोशनी का ही प्रतीक हैं। यदि आप किसी मंदिर या पौराणिक गाथा को दर्शाती किसी तस्वीर को देखेंगे तो आपको...

अविश्वसनीय रहस्य: क्यों मारा श्रीकृष्ण ने एकलव्य को..!!!

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अविश्वसनीय रहस्य: क्यों मारा श्रीकृष्ण ने एकलव्य को..!!! deepika gupta  |  September 11, 2017  |  अविश्वसनीय रहस्य |  2 Comments भगवान श्रीकृष्ण ने छल से एकलव्य का वध कर दिया एकलव्य के बारे में तो सब जानते ही है जिसने अपना दाएँ हाथ का अगूंठा द्रोणाचार्य को गुरुदक्षिणा में दे दिया था।एकलव्य निषादराज हिरण्यधनु और माता रानी सुलेखा के पुत्र थे।एकलव्य के युवा होने पर उनका विवाह एक निषाद की कन्या सुणीता से कर दिया गया। आपको जानकर आश्चर्य होगा राजकुमार एकलव्य अंगुष्ठ बलिदान के बाद अपने साधनापूर्ण कौशल से बिना अंगूठे के धनुर्विद्या में पुन: दक्षता प्राप्त कर लेते है। एकलव्य ने अपनी दक्षता के बल पर ही निषाद भीलों की एक सशक्त सेना को गठित किया और निषाद वंश का राजा बनने के बाद एकलव्य ने जरासंध की सेना की सहायता करने के लिए श्रीकृष्ण के राज्य मथुरा पर आक्रमण किया और यादव सेना का लगभग सफाया कर दिया था। जब श्रीकृष्ण ने केवल चार अंगुलियों के सहारे धनुष बाण चलाते हुए एकलव्य को देखा तो उन्हें इस दृश्य पर विश्वास नहीं हुआ। एकलव्य अकेले ही सैकड़ों यादव वंशी योद्धाओं को रोकने में सक...

श्रीराम से जुड़ा है श्रीकृष्ण की 16 हजार पत्नियों का रहस्य!!!

श्रीराम से जुड़ा है श्रीकृष्ण की 16 हजार पत्नियों का रहस्य!!! श्रीमद्भागवत के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने प्राग्ज्योतिषपुरी के राजा नरकासुर का वध किया था। नरकासुर ने 16 हजार स्त्रियों को बंदी बनाया था। नरकासुर के मरते ही वे सभी स्वतंत्र हो गईं। श्रीकृष्ण ने उन सभी के साथ विवाह किया। इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण की 16 हजार रानियां हुईं। ये बात बहुत से लोग जानते हैं, लेकिन इससे जुड़ी एक कथा आनन्द रामायण में भी मिलती है, इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। आज हम आपको उसी कथा के बारे में बता रहे हैं। श्रीराम ने लिया था ये व्रत आनन्द रामायण के अनुसार, राम राज्य स्थापित होने के बाद एक दिन जब भगवान श्रीराम अपने महल में थे, तब उनसे मिलने महर्षि वेदव्यास अपने शिष्यों के साथ आए। बातों ही बातों में श्रीराम ने उन्हें बताया कि मैंने एकपत्नी व्रत धारण किया है इसलिए सीता को छोड़कर मेरे लिए संसार की सभी स्त्रियां माता कौशल्या के समान है। श्रीराम ने किया था ये दान श्रीराम की बात सुनकर वेदव्यासजी ने कहा कि आपने जो एकपत्नी व्रत लिया है, उसके प्रभाव से कृष्ण जन्म में आपकी बहुत ही पत्नियां होंगी। वेदव्यासजी ने ये ...

जानिए, क्यु हनुमानजी की वजह से हुई थी श्री राम की म्रत्यु ?

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जानिए, क्यु हनुमानजी की वजह से हुई थी श्री राम की म्रत्यु ? Admin  |  March 25, 2017  |  हिंदू देवी देवता  |  131 Comments प्रकृति का तो ये नियम हे की जो इस संसार में एक बार आता हे उसे एक न एक दिन इस संसार से जाना ही होता हे| यही नियम भगवान राम पर भी लागु होती है क्योकि त्रेयायुग में उन्होंने मनुष्य रूप में जन्म लिया था जब भगवान राम के पृथ्वी पर आने का लक्ष्य पूरा हो चुका था तब उन्होंने इस प्रकृति के नियम को अपनाने का निश्चय किया । लेकिन यमराज जी तब तक श्रीराम को मृत्यु लोक से नही ले जा सकते थे जब तक हनुमान जी उनके साथ हो । तो यमराज ने अपनी यह दुविधा भगवान श्रीराम को बताई | ये था कारण श्री राम की म्रत्यु का – यमराज की इस दुविधा को दूर करने उपाय श्री राम को मिल चूका था| उन्होंने यमराज से कहा की वह अपनी अंगूठी एक छिद्र में गिरा देंगे और हनुमानजी को उसे ढूंढने भेज देंगे तब आप मुझे म्रत्यु लोक से ले जाना। यमराज,श्री राम की इस बात से सहमत हो गए | श्री राम ने अपने कथित अनुसार अंगूठी को एक गहरे छिद्र में गिरा दिया|वो छिद्र भुत ज्यादा ही गहरा था जो सीधे नागलोक तक ज...

आखिर किस वरदान की पूर्ति के लिए कृष्ण रूप में जन्म लिया भगवान् विष्णु ने; जरूर पढ़ें..!!! भाग-1 .

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आखिर किस वरदान की पूर्ति के लिए कृष्ण रूप में जन्म लिया भगवान् विष्णु ने; जरूर पढ़ें..!!! भाग-1 . deepika gupta  |  April 12, 2018  |  हिंदू देवी देवता  |  2 Comments धार्मिक   कहानियाँ ( RELIGIOUS STORIES ) हमारे पुराणों में हर  भगवान  की कथा का वर्णन मिलता है। जिसकी अपनी अलग महत्ता है । श्रीकृष्ण पर सबसे ज्यादा रोचक कथाएं जिस भगवान् की है वे है भगवान् श्री कृष्ण (Krishna) की। कान्हा के जन्म की कथा तो अपने आप में बहुत ही रोचक है। ये तो आप सबको मालूम ही है कि कान्हा का जन्म देवकी (Devki) माँ द्वारा हुआ था। और उनका पालन पोषण यशोदा मैया द्वारा किया गया था । श्रीकृष्ण ऐसे में एक सवाल ये खड़ा होता है कि यदि श्रीकृष्ण (Krishna) जी चाहते तो वो सीधे तौर पर यशोधा मैया द्वारा जन्म ले सकते थे । पर इसकी एक बहुत बड़ी वजह है। आज जो कथा हम आपको बता रहें है वह है कैसे श्रीकृष्ण (Krishna) ने अपना वचन पूरा करने हेतु मानव रूप में जीवन लिया । कृष्ण रूप में जन्म लिया भगवान् विष्णु ने पुराणों में उसका बड़ा ही सुंदर बखान पढ़ने को मिलता है । इस व्याख्या की २ कथ...

प्रसंग जो तुलसी का भगवान कृष्ण को अति प्रिय होने की ओर करती हैं इशारा; जरूर पढ़ें..!!!

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प्रसंग जो तुलसी का भगवान कृष्ण को अति प्रिय होने की ओर करती हैं इशारा; जरूर पढ़ें..!!! deepika gupta  |  October 2, 2017  |  अविश्वसनीय रहस्य ,  हिंदू देवी देवता  |  10 Comments भगवान श्रीकृष्ण लीलाधर हैं जिन्होंने अपनी लीलाओं से सबका मन मोह रखा हैं। ऐसे में आज हम आपको उनकी ही एक ऐसी लीला के बारे में बता रहें हैं जो बताएगी की उनको तुलसी कितनी पसंद हैं इसके पीछे एक पौराणिक कहानी है, बता दें कृष्ण विष्णु का अवतार हैं और भगवान विष् तुलसी का विवाह णु को तुलसी बहुत प्रिय हैं इसलिए कृष्ण को भी प्रिय हैं ।पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सत्यभामा को घमंड हो गया था कि कृष्ण को वे ही सबसे प्रिय हैं । जब यह बात नारद मुनि को पता चली तो उन्होंने इस घमंड को खत्म करने का निश्चय किया क्योंकि वे जानते थे कि कृष्ण से सबसे अधिक तुलसी प्रिय हैं।   नारद मुनि द्वारका पहुंचे और अपनी लीला शुरू की। उन्होंने सत्यभामा को अपनी बातों के जाल में फंसाया और कहा कि तुलाभ्राम व्रत करने से कृष्ण और आपके बिच का प्रेम कई गुणा बढ़ जाएगा। इस व्रत में उन्हें नारद जी को कृष्ण का दान करना होगा...

Gautama Buddha in Hinduism

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Gautama Buddha in Hinduism "Buddha as an avatar of Vishnu" redirects here. For other uses, see  Buddha (disambiguation) . In the  Vaishnavism  sect of hinduism, the historic Buddha or  Gautama Buddha , is considered to be an  avatar  of the Hindu god  Vishnu . [1]  Of the  ten major avatars of Vishnu , Vaishnavites believe Gautama Buddha to be the ninth and most recent incarnation. [2] [3] Buddha as an avatar at  Dwaraka Tirumala  temple, Andhra Pradesh Buddha's portrayal in Hinduism varies. In some texts such as the  Puranas , he is portrayed as an avatar of Vishnu born to mislead those who deny the Vedic knowledge. [3] [4] [note 1]  In others, such as the 13th-century  Gitagovinda  of Vaishnava poet  Jayadeva , Vishnu incarnates as the Buddha to end the animal slaughter in vedic sacrifices. [2] In contemporary Hinduism, state Constance Jones and James D. Ryan, Buddha is revered by Hindus who usually consid...