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सतयुग मे हु़ई हनुमान जी से एक यह एक गलती, जिसकी सजा आज भी सहती है यहा की महिलाएं !!!

सतयुग मे हु़ई हनुमान जी से एक यह एक गलती, जिसकी सजा आज भी सहती है यहा की महिलाएं !!! पवन पुत्र हनुमान जी की शक्ति एवं महिमा अपरम्पार है हर जगह हनुमान जी के भक्त उनकी भक्ति में रंगा रहते है. परन्तु क्या आप जानते है की एक ऐसा भी गाव है जहां हनुमान जी के द्वारा की गई एक गलती के कारण वहां के लोग विशेषकर महिलाएं हनुमान जी से नाराज है।रामायण काल में घटित इस घटना ने इस गाव में एक अजीब सी प्रथा को जन्म दे दिया है जिस कारण यहाँ की महिला अत्यधिक परेशान रहती है और इस परेशानी का दोष वे हनुमान जी को देती है। आइये आज हम आपको गाँव की उस अजीब सी प्रथा एवं हनुमान जी द्वारा की गई उस एक गलती के संबंध में बतलाते है। उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में एक द्रोणागिरि नामक गाव 14000 फुट की उच्चाई पर स्थित है। इस दुर्गम गाव में सभी भगवान देवी-देवताओ की पूजा की जाती सिर्फ एक भगवान को छोड़कर और वे है संकटमोचन पवन पुत्र हनुमान जी।लक्ष्मण जी के उपचार के लिए संजीवनी बूटी लाकर हनुमान जी भगवान श्री राम एवं वानर सेना के लिए तो हीरो बन गए परन्तु इस गाव के सभी लोग हनुमान जी से नाराज है। द्रोणागिरि के लोग आज तक हनुमान जी क...

हैरानी होगी पढ़ने में; रामायण काल के दौरान किया था विभीषण ने पहला मोबाइल इस्तमाल, थे और भी कई आधुनिक यन्त्र..!!!

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हैरानी होगी पढ़ने में; रामायण काल के दौरान किया था विभीषण ने पहला मोबाइल इस्तमाल, थे और भी कई आधुनिक यन्त्र..!!! deepika gupta  |  September 11, 2017  |  अविश्वसनीय रहस्य |  3 Comments   लंकापति रावण के छोटे भाई विभीषण आपको हैरानी तो होगी यह पढ़ने में लेकिन शोधकर्ताओं का ऐसा कहना है कि सबसे पहले रामायण काल के दौरान लंका में दूरसंचार के यंत्रों का निर्माण हुआ था। उस युग में इन यंत्रों को मधुमक्खी कहा जाता था। इस यंत्र को दुनिया का पहला मोबाइल भी कहा जा सकता है। कहा जाता है इस यंत्र पर बात करने से पहले एक ख़ास ध्वनि वाली रिंगटोन तक बजती थी। इस ख़ास ध्वनि के कारण ही इस यंत्र को मधुमक्खी कहा जाता था। इस यंत्र के इस्तेमाल की इजाजत केवल राज परिवार के लोगों को थी। इस अनूठे यंत्र के जरिये राज परिवार के लोग कभी भी और कहीं भी बैठे किसी दूसरे व्यक्ति से बात करते थे।शोधकर्ताओं ने पाया कि जब लंकापति रावण ने अपने छोटे भाई विभीषण को देश निकाला दिया था तब वह मधुमक्खी और दर्पण यंत्रों के अलावा अपने 4 मंत्री अनल, पनस, संपाती और प्रभाती को अपने साथ लेकर प्रभु राम की शरण में आए थे...

क्या आपको पता है पांच पांडव गये थे बिना शरीर त्यागे स्वर्ग ??? धरती की इस जगह से ही जाता है स्वर्ग का रास्ता !!!

क्या आपको पता है पांच पांडव गये थे बिना शरीर त्यागे स्वर्ग ??? धरती की इस जगह से ही जाता है स्वर्ग का रास्ता !!! यूं तो कश्मीर को ‘धरती का स्वर्ग’ कहा जाता है। परन्तु क्या आपको पता है कि भारतभूमि पर ही एक ऐसा स्थान है जहां से स्वर्ग की ओर जाया जा सकता है।ऐसी मान्यता है कि मनुष्य मृत्यु के पश्चात स्वर्ग या नर्क जाता है परन्तु इस मार्ग के जरिए मनुष्य बिना शरीर त्यागे स्वर्ग का दर्शन कर सकता है। इस तथ्य की प्रमाणिकता महाभारत काल में मिलता है। यदि प्राकृतिक सुन्दरता के लिए कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है तो उत्तराखंड को कई धार्मिक स्थानों और देवी-देवताओं के वास स्थान के लिए धरती पर स्वर्ग और देव भूमि कहा जाता है, और यह कहना भी उचित है क्योंकि यही वह स्थान है जहां से सीधा स्वर्ग के लिए रास्ता जाता है।उत्तराखंड के गढ़वाल में हिमालय के बंदरपूंछ में स्थित ‘स्वर्गारोहिनी’ चोटी से ही स्वर्ग का रास्ता जाता है। स्वर्गारोहिनी को महाभारत काल से ही स्वर्ग जाने के रास्ते के रूप में मान्यता प्राप्त है। महाभारत काल के ग्रंथों में इस स्थान का बहुत महत्व दिया गया है और इस स्थान के विषय में कहा गया है...

जानें कैसे हुई विष्णु नाम की उत्पत्ति; क्या है विष्णु जी के नाम का अर्थ…!!!

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जानें कैसे हुई विष्णु नाम की उत्पत्ति; क्या है विष्णु जी के नाम का अर्थ…!!! deepika gupta  |  March 30, 2018  |  अविश्वसनीय रहस्य ,  हिंदू देवी देवता  |  4 Comments भारतीय पौराणिक कथा (INDIAN MYTHOLOGICAL STORY) हिन्दू धर्म के आधारभूत ग्रन्थों में बहुमान्य पुराणानुसार विष्णु (Vishnu) परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों में त्रिमूर्ति विष्णु (Vishnu) को जगत का पालनहार कहा गया है। लेकिन क्या आप जानते है त्रिमूर्ती के देवों में से एक विष्णुजी का नाम विष्णु (Vishnu) क्यों पड़ा । भगवान विष्णु उनके इस नाम का अर्थ क्या है। आज हम आपको बताते है इस नाम के पीछे का रहस्य । विष्णु नाम की उत्पत्ति माना जाता है कि विष्णु (Vishnu) शब्द की उत्पत्ति मुख्यतः विष धातु से हुई है। निरुक्त 12.18 में यास्काचार्य ने मुख्य रूप से  विष्  धातु को ही व्याप्ति के अर्थ में लेते हुए उससे विष्णु (Vishnu) शब्द को निष्पन्न बताया है। भगवान विष्णु वैकल्पिक रूप से विष्  धातु  को भी प्रवेश के अर्थ में लिया गया है, ‘क्योंकि वह विभु होने से सर्वत्र प्रवेश...

रामायण के अनुसार,इन 4 स्त्रियों का अपमान करने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रहता..!!आप भी जानें..!!!

रामायण के अनुसार,इन 4 स्त्रियों का अपमान करने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रहता..!!आप भी जानें..!!! हमारे भारत में नारी को लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा के रूप में पूजा जाता है,स्त्री को देवी का स्वरूप माना जाता है। ऐसा कहा जाता है जहाँ स्त्रियों का आदर किया जाता है, वहाँ देवता निवास करते हैं लेकिन जहाँ इनका अनादर होता है, वहाँ सारे काम निष्फल होते हैं। वैसे तो हर नारी सम्मान की पात्र है। मगर तुलसीदास द्वारा रचित राम चरित मानस में चार स्त्रियों के सम्मान की बात को विशेष तौर पर उल्लेखित किया गया है। इसके मुताबिक जो भी व्यक्ति इन चार महिलाओं का अपमान करता है। इनके साथ दुराचार करता है। उसका जीवन हमेशा ही दरिद्रता और आर्थिक तंगी से गुजरता है। आइये जानते है उन ४ स्त्रियों के बारे में: घर की बहु घर की बहु को घर की लक्ष्मी माना जाता है। कहा जाता है कि बहु के प्रवेश के बाद घर में हर काम शुभ होता है। बहु अपना घर छोड़कर पराए घर आती है। ऐसे में उसके साथ आदर का भाव रखा जाना चाहिए। ऐसा पुरुष जो घर की बहु का सम्मान नहीं करता,वो कभी भी कहीं भी खुश नहीं रहता। जीवनभर परेशानियां उसके साथ जुड़ी रहती हैं। बड़े भ...

कौन थी शबरी,क्या था उनका असली नाम..!!जरूर पढ़िए..!!!

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कौन  थी शबरी,क्या था उनका असली नाम..!!जरूर पढ़िए..!!! शबरी तो आप सबको याद ही होंगी चलिए आज जानते है कुछ शबरी के बारे में ।शबरी श्री राम की परम भक्त थी जिन्होंने उन्हें झूठे बैर खिलाये थे, शबरी का असली नाम “श्रमणा” था, वह भील सामुदाय के शबर जाति से सम्बन्ध रखती थीं इसी कारण कालांतर में उनका नाम शबरी पड़ा । उनके पिता भीलों के मुखिया थे, श्रमणा उनका विवाह एक भील कुमार से तय हुआ था, विवाह से पहले कई सौ पशु बलि के लिए लाये गए जिन्हें देख श्रम बड़ी आहत हुई. यह कैसी परंपरा जिसके बेजुबान और निर्दोष जानवरो की हत्या की जाएगी इस कारण शबरी विवाह से 1 दिवस पूर्व भाग गई और दंडकारण्य वन में पहुंच गई। दंडकारण्य में मातंग ऋषि तपस्या किया करते थे, श्रमणा उनकी सेवा तो करना चाहती थी पर वह भील जाति की होने के कारण उसे अवसर ना मिलाने का अंदेशा था। फिर भी शाबर सुबह-सुबह ऋषियों के उठने से पहले उनके आश्रम से नदी तक का रास्ता साफ़ कर देती थीं, कांटे चुनकर रास्ते में साफ बालू बिछा देती थी। यह सब वे ऐसे करती थीं कि किसी को इसका पता नहीं चलता था। 1 दिवस ऋषिश्रेष्ठ को शबरी दिख गई और उनके सेवा से अति प्रसन्न हो गए ...

जानिए क्यों; इतना बड़ा सोने का महल होते हुए भी रावण ने रखा था माता सीता को अशोक वाटिका में..!!!

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जानिए क्यों; इतना बड़ा सोने का महल होते हुए भी रावण ने रखा था माता सीता को अशोक वाटिका में..!!! deepika gupta  |  September 19, 2017  |  अविश्वसनीय रहस्य |  1 Comment आज हम बात कर रहें है की ऐसा क्या हुआ था की रावण का इतना बड़ा सोने का महल होते हुए भी उसने माता सीता को अशोक वाटिका में रखा ,कभी भी माता सीता के समीप आने अथवा उन्हें छूने का भी दुस्साहस नहीं किया ।आप भी सोच रहें होंगे ऐसा क्यों की असुर सम्राट लंकापति रावण यदि चाहता तो वह माता सीता को विवाह के लिए जबरजस्ती विवश कर सकता है अथवा अपनी बात मनवाने के लिए वह माता सीता को कष्ट दे सकता था । लेकिन रावण ने ऐसा कुछ नहीं किया तथा वह माता सीता के स्वीकृति का इन्तजार करता रहा । क्या उसे कोई दर था या वह किसी वचन से बंधा हुआ था । इन सभी सवालों के जवाब हमारे पुराणों में छिपे हुए है जिसके बारे में हम आज आपको यहाँ बताने जा रहे है । लंकापति रावण के स्वर्ण महल का निर्माण कुबेर देव द्वारा किया गया था । सोने का यह महल बहुत ही भव्य एवं विशाल तो था ही इसके साथ ही यह आकर्षक भी था । यदि एक बार कोई इस महल को देख लेता तो इसके आकर्...